भारतीय देशी गोवंश केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि सतत ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार हैं। हम उनके वैज्ञानिक संवर्धन और गो-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देते हैं।
गिर और साहीवाल जैसी नस्लों का वैज्ञानिक संवर्धन ही हमारी कृषि और डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर बना सकता है।